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चचेरी बहन बनी बिस्तर की रानी-2

Wednesday, 24 April 2013

वक़्त देखते हुए मैंने ज्यादा आगे ना बढ़ने का विचार किया और उसको पजामा और अपने कपड़े सही करने को कहा।
वो उठी और अपना पजामा चढ़ाने लगी। मैंने उसको रोका और उसके चूतड़ों पर चूम लिया और पजामा ऊपर कर दिया और अपने कपड़े भी सही कर लिए।
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?
तो वो मुस्कुराने लगी।
मैंने एक बार और उसको किस किया और हम नीचे आ गये।
अब मुझको इंतजार था अगले सही मौके का जब मैं अपनी परी को अपने बिस्तर के रानी बना सकूँ।
प्लान मेरे पास था और जल्दी ही वो काम भी कर गया।
2-3 दिन के इंतजार के बाद ही एक दिन हम लोग चाचा के घर गए। मैंने रीना को एक तरफ ले जाकर सब कुछ समझा दिया और सब लोगो के साथ आकर बैठ गया। थोड़ी देर में रीना आई और चाची को कहा कि उसको किसी काम से बाहर जाना है।
मैंने कहा- मैं भी चलता हूँ, यहाँ बोर हो जाऊँगा। तुमको जहाँ जाना है, वहाँ छोड़ कर मैं अपने दोस्तों से मिलने निकल जाऊँगा। वापसी में तुमको लेता आऊँगा।
मेरी यह बात सबको सही लगी।
रीना ने कहा- मैं तैयार होकर आती हूँ।
थोड़ी देर में रीना लम्बा स्कर्ट और टॉप पहन के आ गई। मैंने अपनी बाइक उठाई और रीना को पीछे बैठा के अपने योजना के अनुसार अपने घर आ गया। घर के चाबी पहले ही मैंने अपने पास रखी थी ताकि कोई भी मेरे वापस आने तक घर आने की सोच भी ना सके।
मैंने घर का ताला खोला और अन्दर आ गया, मेरे पीछे पीछे रीना भी अन्दर आ गई। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। रीना घर के अन्दर जा रही थी, मैंने पीछे से रीना को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गले पर चुम्बन करने लगा। वो भी आँखें बंद करके मज़े ले रही थी। मैं उसके पेट पर हाथ से सहला रहा था, उसके गालों और गले को चूम रहा था।
मेरा लंड जो अब तक उत्तेजना से खड़ा हो चुका था, उसकी कूल्हों क़ी दरार में घुस रहा था।
थोड़ी देर में वो बोली- भईया, अन्दर चलते हैं, यहाँ मुझको शर्म आ रही है।
मैंने रीना को अपनी गोद में उठा लिया। चूंकि उसने स्कर्ट पहनी थी तो उसको उठाते समय मेरा हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर चला गया और उसकी नंगी टाँगें मेरे हाथ में आ गई। इससे वो और शरमाने लगी और उसने आँखें बंद कर ली।
मैं उसको अपने कमरे में ले आया और बिस्तर में बैठा दिया और खुद नीचे उसके घुटनों पर हाथ रख कर बैठ गया। उसकी आँखों में शर्म साफ़ साफ़ दिख रही थी पर शर्म के साथ वासना भी अपना असर दिखा रही थी।
मैंने उससे पूछा- शुरु से सब कुछ करें या जहाँ छोड़ा था, वहाँ से आगे?
तो वो कुछ नहीं बोली।
मैंने सोचा कि यह अभी नई है इस खेल में और अभी तक उसने कुछ किया भी नहीं है तो उसको पहले उत्तेजित करना होगा। एकदम करने से उसको दर्द भी ज्यादा होगा और काम खराब होने का डर भी रहेगा।
सो मैंने उसको उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया जैसा हमारे साथ पहली बार हुआ था। वो मेरे लंड पर बैठ गई और मैं उसकी कमर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।
आज चूंकि घर में कोई नहीं था सो हमको कोई डर भी नहीं था। वो भी अपने चूतड़ आगे पीछे करके मेरा साथ देने लगी। आज मेरे हाथ उसके पूरे जिस्म को सहला रहे थे और बार बार उसके मम्मों पर आकर रुक जाते थे। अब चूंकि वो अपनी कमर हिला कर मेरा साथ दे रही थी तो मैंने अपने दोनों हाथ उसके मम्मों पर रख दिए और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा। मैं उसके मम्मों को कभी पकड़ता, दबाता और कभी उसकी नई नई चूचियों को मसल देता। जब भी मैंने ऐसा करता वो सिसक जाती। मेरे होंठ उसके गले और गालों परबराबर घूम रहे थे।
मैंने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी ओर किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एकदम पतले, गुलाब क़ी पंखुड़ियों से लाल रसीले होंठ थे उसके। मैंने उसके होंठ अपने मुँह में लेकर उसको चूसना शुरु कर दिया। फिर मैं कभी उसके ऊपर का होंठ चूसता, कभी नीचे वाला।
वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब तो हम लोगो क़ी जीभ एक दूसरे के मुँह में सैर कर रही थी। मैंने अपने हाथ उसको घुटनों पर रख दिए और उसकी स्कर्ट ऊपर करना शुरु कर दी। जल्दी ही उसकी स्कर्ट उसके घुटनों तक आ गई थी। मैंने उसकी स्कर्ट के अन्दर हाथ डाला और उसकी जांघों को सहलाने लगा। मेरा हाथ उसकी दोनों जांघों के बीच वाले भाग को छू रहा था जिसको हम आम भाषा में चूत कहते है। अब मैंने उसको खड़ा किया और अपनी पैंट निकाल दी और पीछे से उसका स्कर्ट पूरा ऊपर करके उसको अपने ऊपर बैठा लिया। मेरा लंड उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी गांड में सेट हो के आगे पीछे हो रहा था। थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद जब मेरे हाथों ने उसकी चूत को छुआ तो उसकी पैंटी के बीच वाली जगह गीली हो चुकी थी। अपने अनुभव से मैं इतना समझ गया कि अब लड़की मेरे नीचे आने को तैयार है।
मैंने रीना को उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। मेरे शरीर का सारा भार उसके ऊपर था जिसके कारण हमारे बीच जगह कम हो गई थी और उसके उभार मेरे शरीर में घुस रहे थे। नए नए उभरे हुए मम्मे मेरे सीने में गड़ रहे थे जो मुझको और उत्तेजित कर रहे थे। मेरा लण्ड पहली बार उसकी चूत के मुँह पर छू रहा था।
मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों का रस पीने लगा। उसके हाथ मेरी पीठ पर जमे हुए थे और मुझको अपने से और चिपकाने की उसकी कोशिश मुझको साफ़ पता चल रही थी।
हम लोग ऐसे चिपक रहे थे मानो दोनों अपने बीच में हवा तक नहीं आने देना चाहते हो।
दोस्तो, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूँ कि आप लोगों को सारी बातें महसूस करा सकूँ पर मेरा निवेदन है कि आप लोग अपनी कल्पना का पूरा इस्तेमाल करें ताकि आप वो फीलिंग महसूस कर सके जो हम लोगों के बीच उस वक़्त थी।
मेरे होंठ उसके होंठों से लगे थे और मेरे हाथ उसके टांगों से लेकर उसके सीने तक पूरे जिस्म पर घूम रहे थे और उसके उभारों और गहराइयों को टटोल रहे थे। उसका स्कर्ट काफी ऊपर हो चुका था और मेरे हाथ उसकी नंगी जाँघों को छू रहे थे जो किसी मक्खन जैसी थी।
मैंने उसको करवट लेकर लिटा दिया और उसके पीछे आकर उसके टॉप में हाथ डाल दिए। मेरे हाथ उसके नंगे पेट को सहलाते हुए उसके मम्मों तक चले गए जो ब्रा क़ी कैद में थे।
मैंने ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को दबाना शुरु कर दिया। सहलाने का वक्त अब जा चुका था और अब वक्त था जंगली सेक्स करने का।
मैं उसके मम्मों को मसलने लगा और वो आँखें बंद करके उसके मज़े ले रही थी। मैंने बिना समय गंवाए उसका टॉप ऊपर कर के उतार दिया और अपनी टीशर्ट भी अलग करके उसके पीछे से चिपक गया। मैं उसकी नंगी पीठ पर किस करने लगा और हाथों से उसके पेट, नाभि, मम्मों को सहलाने और दबाने लगा। मैंने उसकी ब्रा का स्ट्रेप उसके कंधों से नीचे कर दिया और उस जगह किस किया।
अब उसके सीधे होने का समय था। मैंने जब उसको सीधा किया तो उसने अपने हाथों से अपने मम्मों को छिपाने क़ी कोशिश क़ी। उसके ब्रा के स्ट्रेप उसकी कोहनी तक गिर चुके थे और मम्मे आधे चाँद क़ी तरह ब्रा के बाहर झांक रहे थे।
दोस्तो, आप लोगों ने महसूस किया हो तो लडको को लड़की के वो अंग जो पूरे खुले हों, उतने उत्तेजित नहीं करते जितने कि वो अंग करते हैं जो दिख कर भी नहीं दिख पा रहे हों। वही हालत मेरी थी। उसके आधे मम्मे मेरे सामने थे, पूरे दिख नहीं रहे थे। मैंने उसके आधे मम्मों को चूमना शुरु किया और उसकी ब्रा को उसके शरीर से अलग करना शुरु किया।
थोड़ी देर में ही उसका ब्रा उसके जिस्म से अलग होकर मेरे हाथ में झूल रही थी।
ब्रा अलग होते ही उसके आधे कच्चे आम जैसे मम्मे मेरे सामने थे जिन पर छोटी छोटी भूरे से रंग क़ी निप्पल थे। मैंने अपनी जीभ निकाली और उसके निप्पल पर लगा कर उनको चाटने लगा।
थोड़ी देर में ही उसके मम्मे मेरे मुँह में थे, मैं उनको पूरा अपने मुँह में लेना चाहता था पर हो नहीं पा रहा था। मेरे हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर घुस चुके थे और उसके चूतड़ सहला रहे थे।
मैंने काफी देर तक उसके मम्मों का रस पिया फिर अपनी जीभ से उसके पूरे नंगे जिस्म को चाट चाट कर गीला कर दिया। बाकी काम मेरे हाथ ने उसकी स्कर्ट में कर दिया था। वो सिर्फ आँखें बंद करके सबका मज़ा ले रही थी। हालांकि मुझको यह सब अच्छा लग रहा था क्योंकि जिस लड़की को मैं अपने बिस्तर में लाने क़ी सोच रहा था वो आज मेरे बिस्तर क़ी रानी बन के पूरी नंगी होने को तैयार थी।
मैंने अपनी पैंट उतार दी और उसकी नंगी टांगों चाटने लगा। चाटते चाटते मैं उसकी स्कर्ट पूरी ऊपर कर चुका था और मेरा मुँह उसकी चूत के बिल्कुल पास था जहाँ से मैं उसकी चूत क़ी खुशबू ले रहा था। काला रंग वैसे भी मुझको उत्तेजित करता है और उसने काले रंग क़ी पेंटी पहन रखी थी।
मैंने उसकी स्कर्ट एक झटके में उतार कर फेंक दी। एक जवान खूबसूरत लड़की मेरे बिस्तर पर सिर्फ पेंटी में थी। एकदम गोरा रंग, बिना बालों का नमकीन सा जिस्म।
कहानी जारी रहेगी।

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